समुद्र स्तर में वृद्धि

समुद्र स्तर में वृद्धि से तटीय क्षेत्रों मे होने वाले परिवर्तन

समुद्र स्तर में वृद्धि से होने वाले परिवर्तन                    
                  अभी कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के जलस्तर में वृद्धि हुई है|1993 से 2011 तक प्रतिवर्ष जलस्तर में वृद्धि 3.2 एम.एम. रहा है|

विश्व की जनसंख्या का 20% तटीय क्षेत्रों में निवास करते हैं, तथा तटीय क्षेत्र अनेक प्रकार की गतिविधियों का केंद्र है।जैसे उद्योग, कृषि, मनोरंजन और मछली पालन यह सभी समुद्र स्तर में वृद्धि से प्रभावित होंगे। समुद्र स्तर में वृद्धि से सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय क्षेत्र प्रभावित होंगे;

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव;
                    -समुद्र जलस्तर के वृद्धि से तटीय क्षेत्रों में सुनामी/बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। जिससे तटीय क्षेत्रों में स्थिति जनसंख्या किसी अन्य क्षेत्रों में विस्थापित होगी। जिससे जनसंख्या दबाव के साथ-साथ संसाधनों का अधिक दोहन होगा|
                   

– समुद्री स्तर में वृद्धि से विस्थापित जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा और इससे गरीबी बेरोजगारी और अशिक्षा में भी वृद्धि होगी|

– समुद्र स्तर में वृद्धि से कुछ दूरी जैसे मालदीव के डूबने का खतरा है जैसे पहले भी हिंद महासागर में स्थित अंडमान निकोबार के कुछ दीप और इंदिरा पॉइंट जलस्तर में वृद्धि से डूब चुके हैं|  

– समुद्र स्तर में वृद्धि से चक्रवातों का खतरा और बढ़ गया है, जिससे तटों पर स्थित आधारभूत संरचनाएं प्रभावित होंगे|

पर्यावरणीय प्रभाव;
                        – समुद्र स्तर में वृद्धि से मैनग्रोव फॉरेस्ट और रिफ प्रभावित होंगे और समुद्री जैव विविधता में कमी आएगी|
                       – समुद्री स्तर में वृद्धि से भूमिगत जल की लवणता में भी वृद्धि होगी और फ्रेश जल में कमी आएगी|

समुद्र स्तर में वृद्धि
समुद्र स्तर में वृद्धि

कार्यान्‍वयन योजना :

एक व्‍यापक अध्‍ययन के माध्‍यम से समुद्र तल बदलावों के कारण कारकों का आकलन:
       》समुद्री पानी के घनत्‍व (स्‍टेरिक), लवणता (हैलोस्‍टेरिक), तापमान (थर्मोस्‍टेरिक) के संबंध में हिंद महासागर बेसिन की मात्रा में बदलाव सहित संबद्ध और हिमनद / बर्फ पिघलने के कारण मात्रा में बदलाव।
       》भूमि (टेक्‍टोनिक) और डेल्‍टा घटाव के ऊर्ध्‍वाधर विस्‍थापन के कारण हिंद महासागर की ज्‍यामिति के आकार में बदलाव से संबद्ध।

ज्‍वार के दोलनों पर आधारित तटीय परिवेशों का वर्गीकरण और सापेक्ष तरंग / ज्‍वार ऊर्जा, ट्रांसग्रेशन और प्रोग्रेडेशन सहित अस्‍थायी रूपरेखा में फ्लूवियल डिस्‍चार्ज।

समुद्र तल में बदलावों तथा तटीय रेखा के प्रवास पर इसके प्रभाव का अध्‍ययन। कार्बन डेटिंग और बोर होल नमूनों के आधार पर आयु निर्धारण तथा तलछट जमाव के रुझानेां की पहचान – तलछट आपूर्ति और भूगर्भीय विरासत (पूर्ववर्ती भूविज्ञान) जैसे चतुर्धातुक समुद्र के स्तर से इतिहास का संक्षिप्‍त सिंहावलोकन।

तट की रूपरेखा के मापनों से समुद्र स्‍तर में वृद्धि द्वारा क्षरण की घटना में तट के आयतन में होने वाले बदलावों का अध्‍ययन करना तथा तटों की हानि की सीमा का अनुमान लगाना – तलछट परिवहन और संबद्ध मॉडलों से खोए हुए तलछटों के भविष्‍य का आकलन करना।  

प्रस्‍तावित कार्यक्रम रिमोट सेंसिंग में कार्यरत वैज्ञानिकों के साथ भौतिक, रासायनिक, जैविक और भूगर्भीय वैज्ञानिकों से विशेषज्ञता की उपयोगिता पर आधारित एक समेकित मार्ग है और इसे आईसीएमएएम – पीडी द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

                    इस तरह के दुर्भिक्ष से बचने के लिए सही तरीके से पेरिस क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को लागू होना जरूरी है जिससे उनका जनजीवन सुरक्षित होगा जो भविष्य में तटीय क्षेत्रों पर निर्भर होंगे|

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