Chirag Tale Andhera: Truth of life

Chirag Tale Andhera

PART:1

ये कैसी तनहाई

Chirag Tale Andhera
Chirag Tale Andhera

ये कैसी तनहाई
कुछ उलझी सी सच्चाई
राते काटे नहीं है कटती
कुछ ऐसी उलझन सी छाई
               
            बदली घिरी  हुयी है नभ मे
            वर्षा हुई नहीं है मग में
            प्यासा बैठा हूं इस जग में
            ऐसी अन्हियारी है छायी
           
मंजिल दूर खड़ी ललचाए
राही राह भटक ना जाए
ऐसी दुविधा मन में छाए
प्यासा बिन पानी मर जाए

              रातें काली कर कर जागे
              दिन में धूल फाक कर भागे
              बहुधा हार हुई इस जग में
              ऐसा कलंक लिए वो भागे………

    Chirag Tale Andhera 

PART:2

हां मैं शून्य हूं

Chirag Tale Andhera
Chirag Tale Andhera

हां मैं शून्य हूं
मुझे हुंकार भरने दो
छोटा समझ सब ने ठुकराया मुझे
अपने अपने मतलब से रिझाया मुझे
वक्त बेवक्त की तकलीफों में बुलाया मुझे
फिर छोड़कर शून्य बतलाया मुझे

बहुत हुई मतलब फरेबी
जा अब नहीं आता काम मेै किसी के भी
इस मतलबी दुनिया में कुछ ही थे अपने
बोला तो साथ रहकर पूरे करेंगे सपने
जिंदगी की दौड़ में वो आगे निकल गए हैं
जहां से हम चले थे वहीं रह गए

हां मैं दूंगा उन्हें शून्यता का परिचय
फर्श से अर्श की सफर पूरी करके
अपने कलम से इतना दर्द सींचूंगा
वह भी हैरान होगा देख मेरे चर्चे
लेकिन एक कसक मुझे भी खाएगी
इतनी प्यारी दोस्ती ऐसे ही चली जाएगी |

                   ‘Sanu’

3 thoughts on “Chirag Tale Andhera: Truth of life”

  1. आयुष साहू

    तुम भी तन्हा हम भी तन्हा
    फर्क सिर्फ इतना
    तुम किसी मोड़ पर हम किसी और मोड़ पर

    अच्छा सुना हैं आप भी वन्ही जा रहे जंहा हमको भी जाना हैं
    तो ऐसा करते रुखों ! साथ चलते हैं ना
    साथ चलने से तन्हाई रुस्वा हो जाती हैं

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