Motivational Poem

Motivational Poem: Ak achchhe din ki shuruvat

Motivational Poem : 1

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Meri Madhushala

मधुशाला तुम साथ मे हो
तो आँधी से भी लड़ जायेंगे
नही कभी हारेंगे रण मे
करते प्रण हम इस क्षण मे

तपती अग्नि की शाला
या फिर ठंडी हिमशाला
मदमस्ती मे चला मलंगी 
लेकर अपनी मधुशाला

मधुशाला प्राणों सा प्यारा
छलके तो भी तृप्त करें
बूंद-बूंद रसखान छिपा है
ऐसी अपनी मधुशाला

योगी का भी योग छिपा है
इस प्यारी मधुशाला मे
पीकर वो मदमस्त हुवा है
ज्ञान की प्यारी हाला मे

Motivational Poem : 2

Motivational Poem
Motivational Poem

चुन चुन कर दाने लायी थी

परियों की कहानी सुनाई थी

सब बच्चे मेरे सोये थे

गहरे सपनो मे खोये थे

मम्मी ने उनको स्वप्न दिए

मानो जैसे कुछ मन्त्र दिए

कल सुबह-सुबह उन्हें खड़ा किया

छत के परकोटे चढ़ा दिया

ऊंचे गगन के एक छोर पे

ले जाके उन्हें गिरा दिया

निचे का उल्टा देख दृश्य

विस्मृत सा चेहरा बना लिया

मानो जैसे कोई काल खड़ा

हर लेने को है प्राण खड़ा 

माँ तूमने ऐसा कैसे किया

ममता पर कैसे चोट किया

टुटा भ्रम उसने खोले पँख

माँ ने भरा उसे अपने अंक

आँखों से आँसू गिरे बहुत

पर उड़ना उसको सीखा दिया|

Motivational Poem: 3

Motivational Poem
Motivational Poem

हां मैं वही हूं…
       जो रातों में खुलेआम बिकती हूं|
काली समाज के काले सेज पर सजती हूं|
हां मैं वही देवदासी हूं…
     जो सब में प्रसाद की तरह बटती हूं

शर्म खाते हो
     दिन के उजाले में मिलने से भी
हां मै वही साज हूं
     जो दुनिया के हर राग पर बिकती हूं|

हां मै  वही
          एक रात की दुल्हन हूं
किसी एक के लिए
          लेकिन मैं उसी रात कई-कई बार बिकती हूं

मैं टूटती हूं, बिखरती हूं, फिर जुड़कर टूट जाती हूं|
हां मैं वही गुड़िया हूं….
       जो जिंदा रहने के लिए पूरे समाज से लड़ती हूं

गंदा लगता है जिसको मेरा इस तरह से बिकना
         वही अक्सर रातों में नंगा छोड़ जाते हैं
हां मैं वही परी हूं
     जो रातों में रंगीन और समाज में कुचले गुलाब से दिखती हूं|

हां मैं भी किसी की परी थी
                   पर कुछ थी मजबूरिया
जिस ने बना दी अपनों से दूरियां
            मैं पटकथा कहानी या किस्सा नहीं हूं
                   समाज में हूं पर उसका हिस्सा नहीं हूं

शीतलता की आस में
      मैं हर रोज गुजरती हूं
हां मैं वही हूं
        जो रातों में खुलेआम बिकती हूं…….

Motivational Poem: 4

तू अपना काम करता चल

तू डरता क्यूँ है अंधकार से
फैले हुए इन कुचक्र जालों से
तू रवि की रोशनी से बढ़ता चल
तू अपना काम करता चल

माना विपरीत है ये मौसम
फैली अंधियारी रोशनी मद्धम
तू अंधियारी से भी लड़ता चल
तू अपना काम करता चल

तुझमें साहस और ओज भरा
तू मनु का पुत्र सुन धैर्य बढा 
तू आग लगाकर बढ़ता चल
तू अपना काम करता चल

तुझमें भारत का गौरव है
तू कल का उगता सूरज है
तू रूढ़िवाद को ठगता चल
तू अपना काम करता चल

Motivational Poem: 5

पत्थर की इस बस्ती को मै मोम बनाता

जिधर देखता रंगीनी महफ़िल  का साया 
शांत खड़ा स्तब्ध मनुज  कुछ समझ ना आया

संवेदना का ताना-बाना लिए खड़ा हूं
किधर बढू यह सोच बहुत घबराया हूं

सिंध में ज्वार सी लहरें उठी हैं
संकुचित मन से उसने कदम रखी है

जिधर देखता मनुज, मनुज का ही बैरी है
किससे करे गुहार बात बड़ी गहरी है

शांति का प्रस्ताव लिए मैं आया हूं
चढ़ विपत्ति पर स्वयं नसाने आया हूं

ऐसा नहीं हुआ तो सब पछताएंगे
काल से बच के कहां तक जाएंगे

जन-जन में हो प्रेम राग में यही सुनाता
पत्थर की इस बस्ती को मै मोम बनाता

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