Ran bhumi fir saji huyi hai…..

रणभूमि फिर सजी हुई है जंग की है तैयारी
माँ से लेकर आशीर्वाद चले है तिरंगा धारी

काली  सा श्रृंगार  देख शत्रु  मे हलचल  छाया
एक नहीं  सौ  से लड़ने का साहस  सबने दिखाया

एक-एक रण बाकुर भारी था शत्रु  के सेना पे……
जैसे मानो सिंह लड़ रहा गरज रहा दुश्मन पे.

एक हाथ बन्दूक लिए और दूसरे मे था झंडा…………..
गोली सीने से पार थी लेकिन झुका नही तिरंगा

मरते-मरते दिखा गया वो अपने साहस  की सीमा
शत्रु  मे आतंक कर गया दूभर कर गया जीना

युद्ध  हुआ  फिर  से तब पीछे पछताओगे…………..,
कश्मीर मे अपनी सेना  की  क्या क़ब्र बनवाओगे?

भूल गए हो क्या तुम, कारगिल की वो हार?
या फिर भूल गए, विक्रम बत्रा …की हुंकार

जिससे  दहली थी रणभूमि वो ऐसा था वीर……..
मर के भी वो सीखा गया और दिखा गया तस्वीर

गाँधी जैसा धैर्य छीपा है, आजाद जैसी ताकत
चाणक्य जैसी बुद्धि है, ना करना हमको आहात

ना करना हमको आहात, नहीं दोहरायेंगे इतिहास
भविष्य की छोडो, नही रहेगा तुम्हारा आज

हम शांति के अग्रदूत है, हमसे ना टकराओ
लड़ना है तो लड़ो  अशिक्षा  से, और गरीबी हटाओ 

विश्व मंच पर कर्म द्वारा, कुछ तो नाम कर जाओ..
पाकिस्तान मैं पाक जैसा कुछ तो कर के दिखाओ

                                                                           ‘SANU’

                                                    

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